सोचा भी न था कि मालवा और मीठी यादों की जुगत में सजाया चिट्ठा आतंक और निहायत नापंसंद से विषय 'राजनीति' की दिशा ग्रहण कर लेगा |
लेकिन ऊपर की लुभावनी लीपा पोती से सजा आधुनिक संसार अंदरूनी तौर पर कितना खोखला हो चला है सोच सोच कर ही विकलता बढ़ने लगती है इसीलिये मिठास और रस से भरे शब्द, अनचाहे अनचीते ही विकलता दर्शाने लगे और आतंक / मीडिया / नेता वगैरह गिरफ्त में आ गए | भरोसा है जल्दी निजात मिल जायेगी |
एक चिंताग्रस्त मित्र नें चिंतित लोगों की चौपाल जमाने की जुगत की और इन पंक्तियों के लेखक को भी चिंतनशील समझ कर एक चिन्तालेख भेजने का न्योता भेज दिया |
ये आम भारतीय के विचार माने जा सकतें हैं | इस लिहाज़ से कहा जाए तो आम भारतीय, तथाकथित नेताओं से कुंठित है लेकिन कुछ कर नहीं पाता ; मीडिया से व्यथित है, परन्तु कुछ कर नहीं पाता ; धर्म के बदले अर्थ से क्षुब्ध है, लेकिन कुछ कह नहीं पाता | दरअसल हर दिशा में उनका बोलबाला है जिनकी बोलती बंद होनी चाहिए थी | उनका नाम गिनाएंगे तो गिनाते रह जायेंगे |
ऐसा नही कि नागरिक निष्क्रिय रहे हों, लेकिन अपनी सीमित शक्तिसंपन्नता की कारण वे नक्कारखाने की तूती भर ही तो हैं | इतने ब्लॉग, इतनी आवाज़ - पहले कभी नहीं थी | अखबारों के समाचार और विचार पर तुरत फुरत कमेन्ट, इतने पहले कभी नहीं थे | बहुत कुछ सकारात्मक भी लिखा गया लेकिन जूँ टस से मस नहीं हुई | चिंता करने वाले भले ही शहर काजी की तरह बीमार हो गए हों |
हालात बिगड़ने के पीछे के कारण बहुत हैं | मीमांसा करेंगे तो हम सबका खोखलापन और नंगापन सामने आ जायेगा | इन्हें सुधार लें तो आज से बेहतर संसार निकट अतीत में तो नहीं रहा मिलेगा |
पहला कारण है उपभोक्तावाद | अपने भौतिक सुख के चाह में स्वार्थ और स्वार्थ के आड़ में वैमनस्यता , पनपती ही है | आध्यात्म घटता है तो त्याग लुप्त होता है और दीवारें बनती हैं व बढ़ती रहती हैं | नेताओं के ह्रदय की मलीनता इसी उपभोक्तावाद की देन है | बचपन में हम नेताओं के पाठ श्रद्धा से पढ़ते थे आज अपने बच्चों को नेताओं के नाम से दूर ही रखते हैं | निष्ठा खो गयी है क्योंकि नेता कलंकित होते जा रहे हैं | देश पर हालिया आतंकी हमलों की श्रृंखला के दौरान नेताओं ने जिस तरह का बर्ताव किया वह आतंकवादियों की तुलना में ज्यादा ही हानिकारक रहा |
आलम यह कि जो धर्म का मर्म नहीं समझते वे धर्म का खेल खेलते हैं | इधर हिन्दू कर्मकान्डियो की बाढ़ है और उनका प्रदर्शन ही धर्म कहला रहा है |इसी तरह इस्लामी श्रेष्ठता लुप्त सी है | जन्नत और ख़ज़ाने के नाम पर बरगलाए गए नौज़वान दूसरी कौम को समझे वगैर नेस्तनाबूद कर देना चाहते हैं | और तुर्रा यह कि नेता आग बढाने में कोई कसर बाकी नहीं रखते | चाहे वह अमर सिंह हों अर्जुन सिंह हो अंतुले हों या तोगडिया ही |
विश्वास करें या न करें, इस दुर्दशा का दूसरा प्रमुख कारण हमारा अधार्मिक हो जाना ही है | अधार्मिक अर्थात अनैतिक और आध्यात्मिकता-हीन | निर्दयता और चतुरता का बोलबाला है | प्रेम दया करूणा सह्रदयता कब स्त्रियोचित समझे जाने लगे और कब हमारी संस्कृति से लुप्त हो गए पता ही नहीं चला | जो जितना विलासी वह उतना ही सफल | पैमाने बदल गए | केबल के माध्यम से संस्कृति लीक हो जायेगी अंदेशा तो था पर लीकेज की इतनी तीव्रता का अंदाजा नहीं था | अब 'पूस की रात ' की तरह फसल की तबाही पर बेफिक्री का अहसास जल्द ही आने वाला है | जब संस्कृति ही नहीं रही तो बचाने की मशक्कत क्यों की जाए ? इधर सरकार की नींद बताती है कि नशा कितना गहरा था |
पिछले दिनों लगातार तार तार कर देने वाली खबरें आती रही ; अभी भी आ रही है | युद्ध होगा , नहीं होगा | हिन्दू आतंकवाद , मुस्लिम आतंकवाद | बुरे मुस्लिम , अच्छे मुस्लिम | कोंडालिसा राईस , गिलानी ज़रदारी | कसाब, कसाब का वकील | अंतुले, सोनिया |
इन सबसे अलग उनकी सुध तो लें जो गरीब मुम्बई के शिवाजी टर्मिनस पर दुनिया लुटा बैठे | वे क्या कहते है ? मुंबई की एक झुग्गी में रहने वाली सावित्री गुप्ता बिहार के एक छोटे से गांव से मुंबई आकर अपने पति के साथ रह रही थी अब अकेली हैं, कहती हैं, ‘‘युद्ध से कोई समाधान नहीं निकल सकता | मेरा जो जाने वाला था वो तो चला गया ; किस्मत में यही लिखा था शायद | पाकिस्तान से लड़ के क्या होगा ? असली समस्या बेरोज़गारी है | जिसने मेरे पति को मारा अगर उसके पास अच्छा रोज़गार होता तो शायद वो आतंकवादी नहीं बनता | डेढ़ लाख रूपए के लिए डेढ़ सौ लोगों को नहीं मारता | पाकिस्तान को चाहिए कि अपने युवाओं को रोज़गार दे ताकि आतंकवाद रुके |' ये वो सच्चाई है जिसे सावित्री जैसी कम पढ़ी लिखी महिला तक बखूबी समझती है | ऐसे में युद्ध और उसकी धौंस दोनों देशॉं का , दोनों कौमों का, दोनों तहज़ीबों का कितना नुकसान कर रही है सोचा है ? भरपाई शायद इतनी आसान ना हों |
हमारे देश में भी नेता अपने ओछेपन से बाज आये तो कुछ कल्याण हो |
भोपाल रविवार २८ दिसम्बर २००८
मालव मिट्टी की सुगंध से श्रेष्ठतर इस ब्रह्माण्ड में भला कुछ और हों सकता है ?
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28.12.08
29.11.08
किस किस को कोसें
इस बार फिर मंथन का कुछ मसाला मिला है क़्वेस्ट के मंच से ..
ताज होटल और दीगर ठिकाने तो मात्र नाम भर हैं असल बात तो यह है कि हमला भारत की इज़्ज़त पर हुआ है | हमारे नपुंसक मंत्री और नेता हमें याद दिला रहे हैं भारतेंदु हरिश्चंद्र की अंधेर नगरी की | लगता यही है कि नपुंसक राजा स्वयं अपनी आज्ञा से फांसी ले लेंगे | कुछ विचार इन दो दिनों में क़्वेस्ट पर अभिमत व्यक्त करते हुए यहां के लायक लगे | बांचेंगे तो शोक के स्थान पर आक्रोश पाएंगे | कबीरा खडा बज़ार में लिये लुकाठी हाथ ! जो घर बारै आपना चलै हमारे साथ !!
शिवराज पाटिल को बहुत बहुत बधाई कि अपने समय में आतंकवादी हमलों का रिकार्ड तोड़ पाने में सफल रहे हैं ! शिवराज, डटे रहो, पाकिस्तान तुम्हारे साथ है !! इसके अलावा, लगे हाथों अर्जुन सिंह, मुलायम सिंह , लालू , राम विलास को भी बधाई दे दी जाए !
आपको हैरानी होगी यह जानकर कि नव भारत टाइम्स में कुवैत से एक मुस्लिम पाठक ने तो यहां तक व्यक्त किया है कि श्री हेमंत करकरे को मारना हिंदुओं की चाल है क्योंकि श्री करकरे मालेगांव विस्फोटों की जांच कर रहे थे | देश का गृह मंत्री यदि नपुंसक हों तो देश की ऐसी दुर्गति कोई आश्चर्य नहीं |
शिवराज पाटिल कोई इकलोते मंत्री ऐसे हों ऐसा नही है | इतिहास में देश बेंचने वाले अनेक जयचंद हुए हैं | आज भी बिन पेंदी के राजनेताओं का खासा जमघट है | परम आदरणीय श्री लालू यादव्, मुलायम सिंह, अर्जुन सिंह, अमर सिंह और राम विलास पासवान हमारे देश के दैदीप्यमान नक्षत्र हैं जिन पर राष्ट्र साम्राज्ञी सोनिया गांधी को गर्व है | मन मोहन के लाडले ऐसे नेताओं को प्रणाम जिनके ब्रह्म वाक्यों के कारण ही हमारा देश आतंकियों से होने वाली मौतों के सारे रिकार्ड तोड सका है | हम इस दिशा में सर्वोपरि हैं | मोहन चंद शर्मा को तो अमर / अर्जुन पहले ही दोषी बता चुके हैं | सवाल यह कि हम प्रणाम किसको करें ? दिवंगत को या अमर - अर्जुन को ?
हाल ही में पुनः मीडिया का गैर जिम्मेदाराना व्यवहार उजागर हुआ है | वह बिना सेना या कमांडो से परामर्श लिये वह सब दिखाती रही जो आतंकवादियों के लिये हितकारी था | टी आर पी की चाह में देश का अहित मीडिया के लिये कोई नयी बात नहीं रह गई है | ऐसे में सूचना प्रसारण मंत्रालय पर भी बडा दायित्व आन पडा है |
ज्योतिषी कहते हैं : "जब मुंबई आतंकवादियों के निशाने पर थी तब कर्क लग्न चल रहा था। लग्न में केतु द्वितीय मारक भाव में शत्रु सूर्य की राशि पर शनि महाराज विराजमान थे। शनि की लग्नेश चंद्र पर तृतीय पूर्ण दृष्टि थी। चंद्र लग्नेश होकर चतुर्थ में शुक्र की तुला राशि पर था जो कि उसकी शत्रु राशि है। चतुर्थ भाव जनता का है वही भवन का है और आतंकवाद ने इन पर ही निशाना बनाया। "
उनका आगे कहना है : "यहाँ पर मंगल, सूर्य, बुध तीनों शनि के नक्षत्र अनुराधा में हैं। वहीं शु्क्र सुखेश होकर छठे भाव में है। यही कारण है कि आतंकवादी हमला हुआ। "
अब बताइए ये जानकारी हमारे किस काम की ?
इसमे आश्चर्य की कोई बात नही ; ज्योतिष का चाव ही कुछ ऐसा है | ज्योतिष की विशेषता है कि यह हमें वर्तमान से दूर ले जाता है जहां स्वप्न बिकते हों | किसी समय सिर्फ़ भारतीय फिल्में ही सपनों की सौदागरी करती थीं आज बाज़ार में ज्योतिष की भी भारी धूम है | किसी फोरम पर भी देख लो दो चार लोग दुकान खोले मिल ही जायेंगे | बेरोज़गारी में ये धंधा अच्छा है | कोई कसौती भी नहीं और दाम भी चौखा !!
इधर मैंने अभी अभी मानवाधिकारवादी का चश्मा पहना है | चश्मा पहनने के बाद मैं देखता हूं कि हिंदुस्तानी कमांडो बहुत ज़ुल्म कर रहे हैं उन्होंने नरीमन हाउस में 'फंसे' पाकिस्तानी चरमपंथियों को बे-रहमी से मार डाला है | ऐसा नहीं होना चाहिए था | आख़िर वे भी मानव हैं | वे बेचारे भूंखे प्यासे और गिनती के ; जबकि इधर कमांडो अनेक | यह अमानवीय है ! भारत सरकार को चाहिये कि चरमपंथियों की सुरक्षा और भोजन- पानी के पुख्ता इंतज़ाम करे | ( चश्मा अभी यथावत जारी है)
किसी ने मेरी इस राय पर आपत्ति की कि एक देश भक्त की तरह सोचा करों लेकिन्, यह मेरा दोष नही वरन चश्मे का है ! आख़िर ये मानवाधिकारवादी का चश्मा है | इस की विशेषता ही यह है कि ये चरमपंथियों पर अत्याचार नही देख सकता | ये चश्मे विदेश से आयातित होते हैं और देश के दिग्गज पहनते हैं |
चलिए, अंत में जाग सकें तो जाग वाली बात ! वरना, अखबार बाचेंगे, अफसोस ज़ाहिर करेंगे और आखिर में " होंई है सोई जो राम रूचि राखा " कहकर सो जाएंगे !!
किस किस को कोसें जब खोट अपने ही घर में हों ?
..
ताज होटल और दीगर ठिकाने तो मात्र नाम भर हैं असल बात तो यह है कि हमला भारत की इज़्ज़त पर हुआ है | हमारे नपुंसक मंत्री और नेता हमें याद दिला रहे हैं भारतेंदु हरिश्चंद्र की अंधेर नगरी की | लगता यही है कि नपुंसक राजा स्वयं अपनी आज्ञा से फांसी ले लेंगे | कुछ विचार इन दो दिनों में क़्वेस्ट पर अभिमत व्यक्त करते हुए यहां के लायक लगे | बांचेंगे तो शोक के स्थान पर आक्रोश पाएंगे | कबीरा खडा बज़ार में लिये लुकाठी हाथ ! जो घर बारै आपना चलै हमारे साथ !!
शिवराज पाटिल को बहुत बहुत बधाई कि अपने समय में आतंकवादी हमलों का रिकार्ड तोड़ पाने में सफल रहे हैं ! शिवराज, डटे रहो, पाकिस्तान तुम्हारे साथ है !! इसके अलावा, लगे हाथों अर्जुन सिंह, मुलायम सिंह , लालू , राम विलास को भी बधाई दे दी जाए !
आपको हैरानी होगी यह जानकर कि नव भारत टाइम्स में कुवैत से एक मुस्लिम पाठक ने तो यहां तक व्यक्त किया है कि श्री हेमंत करकरे को मारना हिंदुओं की चाल है क्योंकि श्री करकरे मालेगांव विस्फोटों की जांच कर रहे थे | देश का गृह मंत्री यदि नपुंसक हों तो देश की ऐसी दुर्गति कोई आश्चर्य नहीं |
शिवराज पाटिल कोई इकलोते मंत्री ऐसे हों ऐसा नही है | इतिहास में देश बेंचने वाले अनेक जयचंद हुए हैं | आज भी बिन पेंदी के राजनेताओं का खासा जमघट है | परम आदरणीय श्री लालू यादव्, मुलायम सिंह, अर्जुन सिंह, अमर सिंह और राम विलास पासवान हमारे देश के दैदीप्यमान नक्षत्र हैं जिन पर राष्ट्र साम्राज्ञी सोनिया गांधी को गर्व है | मन मोहन के लाडले ऐसे नेताओं को प्रणाम जिनके ब्रह्म वाक्यों के कारण ही हमारा देश आतंकियों से होने वाली मौतों के सारे रिकार्ड तोड सका है | हम इस दिशा में सर्वोपरि हैं | मोहन चंद शर्मा को तो अमर / अर्जुन पहले ही दोषी बता चुके हैं | सवाल यह कि हम प्रणाम किसको करें ? दिवंगत को या अमर - अर्जुन को ?
हाल ही में पुनः मीडिया का गैर जिम्मेदाराना व्यवहार उजागर हुआ है | वह बिना सेना या कमांडो से परामर्श लिये वह सब दिखाती रही जो आतंकवादियों के लिये हितकारी था | टी आर पी की चाह में देश का अहित मीडिया के लिये कोई नयी बात नहीं रह गई है | ऐसे में सूचना प्रसारण मंत्रालय पर भी बडा दायित्व आन पडा है |
ज्योतिषी कहते हैं : "जब मुंबई आतंकवादियों के निशाने पर थी तब कर्क लग्न चल रहा था। लग्न में केतु द्वितीय मारक भाव में शत्रु सूर्य की राशि पर शनि महाराज विराजमान थे। शनि की लग्नेश चंद्र पर तृतीय पूर्ण दृष्टि थी। चंद्र लग्नेश होकर चतुर्थ में शुक्र की तुला राशि पर था जो कि उसकी शत्रु राशि है। चतुर्थ भाव जनता का है वही भवन का है और आतंकवाद ने इन पर ही निशाना बनाया। "
उनका आगे कहना है : "यहाँ पर मंगल, सूर्य, बुध तीनों शनि के नक्षत्र अनुराधा में हैं। वहीं शु्क्र सुखेश होकर छठे भाव में है। यही कारण है कि आतंकवादी हमला हुआ। "
अब बताइए ये जानकारी हमारे किस काम की ?
इसमे आश्चर्य की कोई बात नही ; ज्योतिष का चाव ही कुछ ऐसा है | ज्योतिष की विशेषता है कि यह हमें वर्तमान से दूर ले जाता है जहां स्वप्न बिकते हों | किसी समय सिर्फ़ भारतीय फिल्में ही सपनों की सौदागरी करती थीं आज बाज़ार में ज्योतिष की भी भारी धूम है | किसी फोरम पर भी देख लो दो चार लोग दुकान खोले मिल ही जायेंगे | बेरोज़गारी में ये धंधा अच्छा है | कोई कसौती भी नहीं और दाम भी चौखा !!
इधर मैंने अभी अभी मानवाधिकारवादी का चश्मा पहना है | चश्मा पहनने के बाद मैं देखता हूं कि हिंदुस्तानी कमांडो बहुत ज़ुल्म कर रहे हैं उन्होंने नरीमन हाउस में 'फंसे' पाकिस्तानी चरमपंथियों को बे-रहमी से मार डाला है | ऐसा नहीं होना चाहिए था | आख़िर वे भी मानव हैं | वे बेचारे भूंखे प्यासे और गिनती के ; जबकि इधर कमांडो अनेक | यह अमानवीय है ! भारत सरकार को चाहिये कि चरमपंथियों की सुरक्षा और भोजन- पानी के पुख्ता इंतज़ाम करे | ( चश्मा अभी यथावत जारी है)
किसी ने मेरी इस राय पर आपत्ति की कि एक देश भक्त की तरह सोचा करों लेकिन्, यह मेरा दोष नही वरन चश्मे का है ! आख़िर ये मानवाधिकारवादी का चश्मा है | इस की विशेषता ही यह है कि ये चरमपंथियों पर अत्याचार नही देख सकता | ये चश्मे विदेश से आयातित होते हैं और देश के दिग्गज पहनते हैं |
चलिए, अंत में जाग सकें तो जाग वाली बात ! वरना, अखबार बाचेंगे, अफसोस ज़ाहिर करेंगे और आखिर में " होंई है सोई जो राम रूचि राखा " कहकर सो जाएंगे !!
किस किस को कोसें जब खोट अपने ही घर में हों ?
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